PremDakshak Aura, Soul & Attachment Sanctuary

Check Your Aura & Freedom

मोह, इच्छा, ममता, करुणा और आत्मा का संपूर्ण आत्म-परीक्षण

50 Questions Self-Assessment • मनोभाव, वाणी, संबंध व आंतरिक संतुलन

🕊️ CHECK YOUR PEACE (शांति परीक्षण)

उत्तर दिए प्रश्न0 / 50
Peacefulness Score0 / 5000
वर्तमान स्थिति🌱 शांति की शुरुआत

🕊️ A. मनोभाव व मानसिक संतुलन

#1

क्या आप छोटी-छोटी बातों पर परेशान नहीं होते?

छोटी बात भी मुझे बहुत परेशान कर देती है।
छोटी बातों पर अक्सर परेशान हो जाता हूँ।
कभी परेशान होता हूँ, कभी संभाल लेता हूँ।
अधिकतर छोटी बातों को छोड़ देता हूँ।
लगभग हमेशा छोटी बातों पर शांत रहता हूँ।
छोटी-बड़ी बातों में भी मन की शांति बनाए रखता हूँ।
#2

क्या आप कठिन परिस्थिति में भी अपना धैर्य बनाए रखते हैं?

कठिन परिस्थिति में तुरंत धैर्य खो देता हूँ।
थोड़ी कठिनाई में ही बेचैन हो जाता हूँ।
कुछ समय तक ही धैर्य रख पाता हूँ।
सामान्यतः कठिन परिस्थिति में धैर्य रखता हूँ।
बहुत कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखता हूँ।
कठिन परिस्थिति में भी शांत रहकर समाधान खोजता हूँ।
#3

क्या आप गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय रुककर सोचते हैं?

गुस्से में बिना सोचे तुरंत प्रतिक्रिया देता हूँ।
बहुत कम स्वयं को रोक पाता हूँ।
कभी-कभी रुककर सोचता हूँ।
अक्सर प्रतिक्रिया से पहले सोचता हूँ।
लगभग हमेशा पहले शांत होकर सोचता हूँ।
गुस्से में भी पूरी तरह संयम रखकर सोच-समझकर प्रतिक्रिया देता हूँ।
#4

क्या आप अपने मन को शांत करने का प्रयास करते हैं?

मन अशांत होने पर उसे शांत करने का प्रयास नहीं करता।
बहुत कम प्रयास करता हूँ।
कभी-कभी स्वयं को शांत करता हूँ।
अशांत होने पर अक्सर स्वयं को संभालता हूँ।
लगभग हमेशा मन को शांत करने का प्रयास करता हूँ।
अपनी अशांति को पहचानकर नियमित रूप से मन को शांत और संतुलित करता हूँ।
#5

क्या आप अनावश्यक चिंता को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते?

चिंता आसानी से मुझ पर हावी हो जाती है।
अधिकांश समय चिंता मुझे प्रभावित करती है।
कभी चिंता हावी होती है, कभी संभाल लेता हूँ।
सामान्यतः चिंता को संभाल लेता हूँ।
चिंता के बावजूद लगभग हमेशा संतुलित रहता हूँ।
चिंता को समझकर समाधान पर ध्यान देता हूँ और मानसिक शांति बनाए रखता हूँ।
#6

क्या आप बीती हुई बातों को बार-बार सोचकर परेशान नहीं होते?

पुरानी बातें बार-बार सोचकर परेशान होता हूँ।
अक्सर पुरानी बातें मन में चलती रहती हैं।
कभी-कभी पुरानी बातों में उलझ जाता हूँ।
अधिकतर पुरानी बातों को छोड़कर आगे बढ़ जाता हूँ।
लगभग हमेशा बीती बातों को छोड़ देता हूँ।
अतीत से सीखता हूँ, लेकिन उसे अपनी वर्तमान शांति पर हावी नहीं होने देता।
#7

क्या आप भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान पर ध्यान दे पाते हैं?

भविष्य की चिंता में वर्तमान भूल जाता हूँ।
अक्सर भविष्य को लेकर चिंतित रहता हूँ।
कभी भविष्य की चिंता होती है, कभी वर्तमान पर ध्यान रहता है।
सामान्यतः वर्तमान पर ध्यान रखता हूँ।
लगभग हमेशा वर्तमान में शांत रहकर काम करता हूँ।
भविष्य की योजना बनाते हुए भी वर्तमान क्षण में पूरी तरह संतुलित रहता हूँ।
#8

क्या आप असफलता के बाद भी मन को संतुलित रखते हैं?

असफलता के बाद पूरी तरह निराश हो जाता हूँ।
असफलता लंबे समय तक परेशान करती है।
कुछ समय परेशान होकर फिर संभलता हूँ।
असफलता से सीखकर जल्दी संभल जाता हूँ।
असफलता के बाद भी शांत और सकारात्मक रहता हूँ।
असफलता को सीख मानकर बिना मन की शांति खोए आगे बढ़ता हूँ।
#9

क्या आप दूसरों की बातों को तुरंत व्यक्तिगत रूप से नहीं लेते?

दूसरों की बातें तुरंत दिल पर ले लेता हूँ।
अधिकांश आलोचना मुझे बहुत प्रभावित करती है।
कुछ बातें दिल पर लगती हैं, कुछ छोड़ देता हूँ।
अधिकतर बातों को समझदारी से लेता हूँ।
लगभग हमेशा बात को व्यक्तिगत बनाए बिना समझता हूँ।
दूसरों की बात सुनकर उसके अर्थ को शांत मन से समझता हूँ और अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होता।
#10

क्या आप अकेले में भी अपने मन के साथ सहज रहते हैं?

अकेले रहने पर मन बहुत अशांत रहता है।
अकेले रहने में अक्सर बेचैनी होती है।
थोड़े समय तक अकेले सहज रह पाता हूँ।
सामान्यतः अकेले भी शांत रह सकता हूँ।
अकेले समय को शांति से स्वीकार करता हूँ।
अकेले में भी अपने विचारों के साथ सहज, शांत और संतुलित रहता हूँ।

💬 B. वाणी और व्यवहार

#11

क्या आप क्रोध में भी अपनी वाणी पर नियंत्रण रखते हैं?

क्रोध में बिना सोचे कुछ भी बोल देता हूँ।
अक्सर कठोर शब्द बोल देता हूँ।
कभी-कभी अपनी वाणी रोक पाता हूँ।
अधिकतर क्रोध में शब्दों का ध्यान रखता हूँ।
लगभग हमेशा क्रोध में भी संयमित बोलता हूँ।
क्रोध में भी शांत, सम्मानजनक और सोच-समझकर बोलता हूँ।
#12

क्या आप दूसरों से शांत और मधुर भाषा में बात करते हैं?

अक्सर कठोर या ऊँची आवाज़ में बात करता हूँ।
बहुत कम मधुरता रख पाता हूँ।
परिस्थिति के अनुसार कभी मधुर, कभी कठोर होता हूँ।
सामान्यतः शांत भाषा में बात करता हूँ।
लगभग हमेशा मधुर और सम्मानजनक रहता हूँ।
मेरी वाणी में लगातार शांति, सम्मान और अपनापन रहता है।
#13

क्या आप बहस जीतने के बजाय समस्या का समाधान चाहते हैं?

मेरा उद्देश्य हर हाल में बहस जीतना होता है।
अक्सर अपनी बात सही साबित करने पर जोर देता हूँ।
कभी जीतने, कभी समाधान पर ध्यान देता हूँ।
सामान्यतः समाधान खोजने की कोशिश करता हूँ।
लगभग हमेशा समाधान को अपनी जीत से ऊपर रखता हूँ।
बिना अहंकार के दोनों पक्षों को समझकर शांतिपूर्ण समाधान खोजता हूँ।
#14

क्या आप किसी की बात बीच में काटने के बजाय ध्यान से सुनते हैं?

अक्सर दूसरों की बात बीच में काट देता हूँ।
बहुत कम धैर्य से सुनता हूँ।
कभी ध्यान से, कभी बीच में रोककर सुनता हूँ।
अधिकतर पूरी बात सुनता हूँ।
लगभग हमेशा ध्यानपूर्वक सुनता हूँ।
सामने वाले को पूरी तरह सुनकर उसकी बात और भावना दोनों समझने का प्रयास करता हूँ।
#15

क्या आप असहमति होने पर भी सम्मान बनाए रखते हैं?

असहमति होते ही सम्मान भूल जाता हूँ।
अक्सर असहमति में कठोर हो जाता हूँ।
कुछ लोगों के साथ सम्मान रख पाता हूँ।
सामान्यतः असहमति में सम्मान बनाए रखता हूँ।
लगभग हमेशा विचार अलग होने पर भी सम्मान रखता हूँ।
विचारों में पूरी असहमति होने पर भी व्यक्ति के प्रति सम्मान और शांति बनाए रखता हूँ।
#16

क्या आप दूसरों को अपमानित करने से बचते हैं?

गुस्से या मज़ाक में दूसरों को अपमानित कर देता हूँ।
अक्सर ऐसा हो जाता है।
कभी-कभी गलती से अपमान कर देता हूँ।
सामान्यतः अपमान से बचता हूँ।
लगभग हमेशा दूसरों की गरिमा का ध्यान रखता हूँ।
मेरी वाणी और व्यवहार हमेशा दूसरों के सम्मान और गरिमा की रक्षा करते हैं।
#17

क्या आप तनावपूर्ण स्थिति में भी संयमित व्यवहार करते हैं?

तनाव में अपना नियंत्रण खो देता हूँ।
तनाव में जल्दी प्रतिक्रिया करता हूँ।
कुछ स्थितियों में संभल पाता हूँ।
अधिकांश तनावपूर्ण स्थितियों में संयम रखता हूँ।
बहुत अधिक तनाव में भी शांत रहने का प्रयास करता हूँ।
तनाव के बीच भी स्पष्ट सोच, धैर्य और संयम बनाए रखता हूँ।
#18

क्या आप गुस्से में कठोर शब्द बोलने से पहले सोचते हैं?

बिना सोचे कठोर शब्द बोल देता हूँ।
बहुत कम रुकता हूँ।
कभी बोलने से पहले सोचता हूँ।
अक्सर शब्दों को नियंत्रित करता हूँ।
लगभग हमेशा बोलने से पहले सोचता हूँ।
गुस्से में भी शब्द चुनकर केवल आवश्यक और सम्मानजनक बात करता हूँ।
#19

क्या आपकी उपस्थिति से लोगों को शांति और अपनापन महसूस होता है?

मेरे साथ लोग अक्सर तनाव महसूस करते हैं।
बहुत कम लोग मेरे साथ सहज रहते हैं।
कुछ लोग मेरे साथ सहज महसूस करते हैं।
अधिकांश लोग मेरे साथ सहज रहते हैं।
लगभग सभी लोग मेरे साथ शांति से बात कर पाते हैं।
मेरी उपस्थिति, वाणी और व्यवहार लोगों को सहजता, शांति और अपनापन देते हैं।
#20

क्या आप दूसरों के साथ अनावश्यक विवाद से बचते हैं?

छोटी बातों पर भी विवाद में पड़ जाता हूँ।
अक्सर बहस या विवाद में उलझ जाता हूँ।
कभी बचता हूँ, कभी विवाद में पड़ता हूँ।
अधिकतर अनावश्यक विवाद से बचता हूँ।
लगभग हमेशा शांतिपूर्ण रास्ता चुनता हूँ।
विवाद की स्थिति में भी बिना अहंकार के शांति और समाधान का रास्ता चुनता हूँ।

❤️ C. रिश्तों में शांति

#21

क्या आप परिवार में छोटी बातों को बड़ा विवाद बनने से रोकते हैं?

छोटी बातों को अक्सर बड़ा विवाद बना देता हूँ।
छोटी बातों पर जल्दी बहस शुरू हो जाती है।
कभी रोकता हूँ, कभी विवाद बढ़ जाता है।
अधिकतर विवाद को बढ़ने से रोकता हूँ।
लगभग हमेशा शांतिपूर्वक स्थिति संभालता हूँ।
परिवार में तनाव बढ़ने से पहले समझदारी, प्रेम और संवाद से शांति स्थापित करता हूँ।
#22

क्या आप नाराज़ व्यक्ति से शांतिपूर्वक बात करने का प्रयास करते हैं?

नाराज़ व्यक्ति से मैं भी गुस्से में बात करता हूँ।
बहुत कम शांत रह पाता हूँ।
कभी शांत होकर बात करता हूँ।
अक्सर शांतिपूर्वक बात करने का प्रयास करता हूँ।
लगभग हमेशा धैर्य से बात करता हूँ।
सामने वाले के क्रोध के बावजूद शांत रहकर उसकी बात समझता और समाधान खोजता हूँ।
#23

क्या आप दूसरों की गलतियों को समझने का प्रयास करते हैं?

गलती देखते ही व्यक्ति को दोष देता हूँ।
बहुत कम उसकी परिस्थिति समझता हूँ।
कभी परिस्थिति समझता हूँ।
सामान्यतः गलती के पीछे की वजह समझता हूँ।
लगभग हमेशा पहले समझने का प्रयास करता हूँ।
गलती को देखते हुए भी व्यक्ति की परिस्थिति, भावना और सुधार की संभावना को समझता हूँ।
#24

क्या आप पुरानी नाराज़गी को लंबे समय तक मन में नहीं रखते?

पुरानी नाराज़गी लंबे समय तक मन में रखता हूँ।
अक्सर पुरानी बातें याद रहती हैं।
कभी छोड़ देता हूँ, कभी मन में रखता हूँ।
अधिकतर नाराज़गी छोड़ देता हूँ।
लगभग हमेशा पुरानी नाराज़गी को छोड़कर आगे बढ़ता हूँ।
क्षमा और समझ के साथ पुरानी नाराज़गी को पूरी तरह छोड़कर संबंधों में शांति रखता हूँ।
#25

क्या आप आवश्यकता पड़ने पर माफी मांग लेते हैं?

अपनी गलती होने पर भी माफी नहीं मांगता।
बहुत मुश्किल से माफी मांगता हूँ।
कभी-कभी माफी मांग लेता हूँ।
गलती होने पर सामान्यतः माफी मांगता हूँ।
लगभग हमेशा अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगता हूँ।
अहंकार छोड़कर तुरंत अपनी गलती स्वीकार करता और सच्चे मन से माफी मांगता हूँ।
#26

क्या आप दूसरों को क्षमा करने का प्रयास करते हैं?

दूसरों की गलती को माफ नहीं कर पाता।
बहुत मुश्किल से माफ करता हूँ।
छोटी गलतियाँ माफ कर देता हूँ।
अधिकांश गलतियों को माफ करने का प्रयास करता हूँ।
लगभग हमेशा क्षमा का रास्ता चुनता हूँ।
गलती को सही ठहराए बिना मन से द्वेष छोड़कर क्षमा करने का प्रयास करता हूँ।
#27

क्या आप रिश्तों में अहंकार के बजाय समझदारी को प्राथमिकता देते हैं?

अपनी बात और अहंकार को रिश्ते से ऊपर रखता हूँ।
अक्सर अपनी जीत चाहता हूँ।
परिस्थिति के अनुसार बदलता हूँ।
सामान्यतः रिश्ते को महत्व देता हूँ।
लगभग हमेशा अहंकार से पहले रिश्ते को रखता हूँ।
प्रेम, समझदारी और रिश्ते की शांति के लिए अपने अहंकार को छोड़ सकता हूँ।
#28

क्या आप किसी विवाद में दोनों पक्षों को समझने का प्रयास करते हैं?

बिना जाने तुरंत एक पक्ष ले लेता हूँ।
बहुत कम दोनों पक्ष सुनता हूँ।
कभी दोनों पक्ष सुनता हूँ।
सामान्यतः दोनों पक्षों को सुनता हूँ।
लगभग हमेशा निष्पक्ष होकर दोनों पक्ष समझता हूँ।
बिना पक्षपात दोनों की भावनाएँ, परिस्थितियाँ और तथ्य समझकर शांतिपूर्ण समाधान खोजता हूँ।
#29

क्या आप दूसरों की भावनाओं का सम्मान करते हैं?

दूसरों की भावनाओं की परवाह नहीं करता।
बहुत कम ध्यान देता हूँ।
कुछ परिस्थितियों में ध्यान देता हूँ।
सामान्यतः भावनाओं का सम्मान करता हूँ।
लगभग हमेशा दूसरों की भावनाओं को ध्यान में रखता हूँ।
अपनी बात रखते हुए भी सामने वाले की भावनाओं और गरिमा का पूरा सम्मान करता हूँ।
#30

क्या आप रिश्तों में शांति बनाए रखने के लिए कभी-कभी अपनी बात छोड़ सकते हैं?

अपनी बात छोड़ना स्वीकार नहीं करता।
बहुत मुश्किल से पीछे हटता हूँ।
कभी-कभी छोड़ देता हूँ।
जरूरत पड़ने पर अपनी बात छोड़ देता हूँ।
रिश्ते की शांति के लिए लगभग हमेशा समझौता कर सकता हूँ।
सही परिस्थिति में बिना अहंकार के अपनी बात छोड़कर रिश्ते की शांति को प्राथमिकता देता हूँ।

🌿 D. परिस्थितियों में संतुलन

#31

क्या आपकी योजना के अनुसार कुछ न होने पर भी आप शांत रहते हैं?

योजना बदलते ही बहुत परेशान हो जाता हूँ।
बदलाव से जल्दी चिड़चिड़ा हो जाता हूँ।
कुछ बदलाव स्वीकार कर पाता हूँ।
सामान्यतः परिस्थिति के अनुसार ढल जाता हूँ।
योजना बदलने पर भी शांत रहकर नया रास्ता खोजता हूँ।
योजना असफल होने पर भी सहजता से परिस्थिति स्वीकार कर समाधान खोजता हूँ।
#32

क्या आप आलोचना मिलने पर तुरंत क्रोधित नहीं होते?

आलोचना सुनते ही क्रोधित हो जाता हूँ।
अधिकांश आलोचना मुझे गुस्सा दिलाती है।
कभी क्रोधित होता हूँ, कभी सुन लेता हूँ।
अधिकतर आलोचना शांत होकर सुनता हूँ।
लगभग हमेशा आलोचना को संयम से स्वीकार करता हूँ।
आलोचना में उपयोगी बात खोजकर शांत मन से सुधार का अवसर मानता हूँ।
#33

क्या आप किसी की सफलता देखकर ईर्ष्या करने के बजाय प्रसन्न हो सकते हैं?

दूसरों की सफलता से बहुत ईर्ष्या होती है।
अक्सर तुलना और ईर्ष्या होती है।
कभी ईर्ष्या होती है, कभी खुशी।
सामान्यतः दूसरों की सफलता स्वीकार करता हूँ।
दूसरों की सफलता देखकर अधिकतर प्रसन्न होता हूँ।
दूसरों की सफलता को पूरे मन से सराहता हूँ और उनकी खुशी में सच्ची खुशी महसूस करता हूँ।
#34

क्या आप भीड़, शोर या तनावपूर्ण वातावरण में स्वयं को संतुलित रख सकते हैं?

ऐसे वातावरण में तुरंत परेशान हो जाता हूँ।
जल्दी चिड़चिड़ा या बेचैन हो जाता हूँ।
कुछ समय तक संभाल पाता हूँ।
सामान्यतः स्वयं को संतुलित रखता हूँ।
कठिन वातावरण में भी काफी शांत रहता हूँ।
बाहरी शोर या तनाव के बावजूद भीतर की शांति और संतुलन बनाए रखता हूँ।
#35

क्या आप कठिन निर्णय लेते समय घबराने के बजाय शांत होकर सोचते हैं?

कठिन निर्णय में घबरा जाता हूँ।
चिंता के कारण सही सोच नहीं पाता।
कुछ समय बाद सोच पाता हूँ।
सामान्यतः शांत होकर निर्णय लेता हूँ।
कठिन निर्णय में भी सोच-विचार बनाए रखता हूँ।
दबाव में भी शांत रहकर विकल्पों को समझता और विवेकपूर्ण निर्णय लेता हूँ।
#36

क्या आप समस्या पर ध्यान देने के बजाय समाधान खोजने का प्रयास करते हैं?

समस्या को लेकर ही परेशान रहता हूँ।
अक्सर समस्या की शिकायत करता हूँ।
कभी समाधान खोजता हूँ।
सामान्यतः समाधान पर ध्यान देता हूँ।
लगभग हमेशा समाधान खोजने की कोशिश करता हूँ।
समस्या को शांत मन से समझकर तुरंत व्यावहारिक समाधान खोजने पर ध्यान देता हूँ।
#37

क्या आप अचानक आई परेशानी में धैर्य बनाए रखते हैं?

अचानक परेशानी में घबरा जाता हूँ।
बहुत जल्दी नियंत्रण खो देता हूँ।
कुछ समय बाद संभलता हूँ।
सामान्यतः परिस्थिति संभाल लेता हूँ।
अचानक परेशानी में भी शांत रहने का प्रयास करता हूँ।
अचानक समस्या आने पर भी पहले स्वयं को शांत रखकर फिर समाधान करता हूँ।
#38

क्या आप अपनी भावनाओं को पहचानकर उन्हें सही तरीके से संभालते हैं?

अपनी भावनाओं को समझ नहीं पाता और उनके अनुसार तुरंत व्यवहार करता हूँ।
भावनाएँ अक्सर मेरे व्यवहार को नियंत्रित करती हैं।
कभी भावनाओं को पहचानकर संभालता हूँ।
सामान्यतः अपनी भावनाओं को समझ लेता हूँ।
लगभग हमेशा भावनाओं को पहचानकर संतुलित करता हूँ।
भावना को पहचानता, समझता और उचित तरीके से व्यक्त करता हूँ।
#39

क्या आप हर परिस्थिति को तुरंत बदलने की कोशिश करने के बजाय उसे समझते हैं?

परिस्थिति पसंद न आते ही उसे बदलने की कोशिश करता हूँ।
बहुत कम परिस्थिति को स्वीकार करता हूँ।
कभी समझता हूँ, कभी तुरंत प्रतिक्रिया देता हूँ।
सामान्यतः पहले परिस्थिति समझता हूँ।
लगभग हमेशा पहले समझता और फिर निर्णय लेता हूँ।
परिस्थिति को शांत मन से स्वीकारकर समझता हूँ और केवल आवश्यक परिवर्तन करता हूँ।
#40

क्या आप कठिन समय में भी सकारात्मक सोच बनाए रखते हैं?

कठिन समय में पूरी तरह नकारात्मक हो जाता हूँ।
कठिनाई में सकारात्मक रहना बहुत मुश्किल होता है।
कभी सकारात्मक रह पाता हूँ।
सामान्यतः आशावादी रहने का प्रयास करता हूँ।
कठिन समय में भी सकारात्मक दृष्टिकोण रखता हूँ।
कठिन परिस्थिति में भी आशा, धैर्य और समाधान की संभावना देखता हूँ।

🕊️ E. आंतरिक शांति और सद्भाव

#41

क्या आप दूसरों के प्रति मन में द्वेष रखने से बचते हैं?

दूसरों के प्रति लंबे समय तक द्वेष रखता हूँ।
अक्सर मन में नाराज़गी रहती है।
कुछ लोगों के प्रति द्वेष रहता है।
अधिकतर नाराज़गी छोड़ देता हूँ।
लगभग हमेशा द्वेष से मुक्त रहने का प्रयास करता हूँ।
समझ और क्षमा के द्वारा मन को द्वेष से मुक्त रखता हूँ।
#42

क्या आप बदले की भावना को छोड़ने का प्रयास करते हैं?

बदला लेने की भावना बहुत मजबूत रहती है।
अक्सर बदला लेने का विचार आता है।
कभी बदले की भावना आती है, पर छोड़ देता हूँ।
सामान्यतः बदले के बजाय शांति चुनता हूँ।
लगभग हमेशा बदले की भावना को छोड़ देता हूँ।
चोट या अन्याय के बाद भी बदले के बजाय न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाधान चुनता हूँ।
#43

क्या आप दूसरों के सुख और शांति की कामना करते हैं?

मुझे दूसरों के सुख की परवाह नहीं होती।
बहुत कम दूसरों के सुख के बारे में सोचता हूँ।
अपने करीबी लोगों के लिए कामना करता हूँ।
सामान्यतः दूसरों के सुख की कामना करता हूँ।
अधिकांश लोगों के लिए सुख और शांति चाहता हूँ।
बिना भेदभाव सभी के सुख, शांति और कल्याण की सच्चे मन से कामना करता हूँ।
#44

क्या आप प्रकृति और अपने आसपास के वातावरण के प्रति शांतिपूर्ण व्यवहार रखते हैं?

प्रकृति और वातावरण की परवाह नहीं करता।
बहुत कम ध्यान देता हूँ।
कभी-कभी ध्यान रखता हूँ।
सामान्यतः स्वच्छ और शांत वातावरण बनाए रखता हूँ।
लगभग हमेशा प्रकृति और वातावरण का ध्यान रखता हूँ।
प्रकृति, जीव-जंतुओं और वातावरण के प्रति जिम्मेदार, संवेदनशील और शांतिपूर्ण व्यवहार करता हूँ।
#45

क्या आप अपने जीवन में प्रेम, क्षमा और करुणा को महत्व देते हैं?

इन गुणों को अपने जीवन में महत्व नहीं देता।
बहुत कम महत्व देता हूँ।
कभी-कभी इनका पालन करता हूँ।
सामान्यतः इन गुणों को महत्व देता हूँ।
लगभग हमेशा प्रेम, क्षमा और करुणा से कार्य करता हूँ।
इन गुणों को जीवन का आधार मानकर हर परिस्थिति में इनका आचरण करता हूँ।
#46

क्या आप प्रतिदिन कुछ समय मौन, ध्यान या प्रार्थना में बिताते हैं?

मौन या ध्यान के लिए बिल्कुल समय नहीं निकालता।
बहुत कम या कभी-कभार ही बैठता हूँ।
सप्ताह में एक-दो बार शांत बैठता हूँ।
प्रतिदिन 5-10 मिनट मौन व प्रार्थना करता हूँ।
नियमित रूप से ध्यान और आत्ममंथन करता हूँ।
मौन व ध्यान को अपनी आत्मा का भोजन मानकर रोज़ पवित्रता से साधना करता हूँ।
#47

क्या आप भौतिक वस्तुओं के नुकसान पर अपनी मानसिक शांति नहीं खोते?

वस्तु खोने या टूटने पर भयंकर क्रोध और दुख में भर जाता हूँ।
बहुत लंबे समय तक नुकसान का शोक मनाता हूँ।
थोड़ा दुखी होता हूँ फिर संभलता हूँ।
वस्तुओं के अनित्य स्वभाव को समझकर आगे बढ़ता हूँ।
भौतिक नुकसान में भी शांत बना रहता हूँ।
बाहरी वस्तुओं की अपेक्षा अपनी आन्तरिक शांति को अनमोल रत्न मानकर अचल रहता हूँ।
#48

क्या आप दूसरों की व्यक्तिगत पसंद और जीवनशैली का सम्मान करते हैं?

दूसरों के भिन्न विचारों और जीवनशैली पर तुरंत निर्णय सुनाता हूँ और विरोध करता हूँ।
दूसरों का अलग होना मुझे असहज करता है।
कभी-कभी स्वीकार कर लेता हूँ।
दूसरों की भिन्नता का सम्मान करता हूँ।
सबके अपने रास्ते और अधिकारों को सहजता से स्वीकार करता हूँ।
विविधता में ही सृष्टि का सौंदर्य समझकर बिना किसी निर्णय या पूर्वाग्रह के सबका सम्मान करता हूँ।
#49

क्या आप मन में किसी के प्रति कड़वाहट के बजाय सर्वत्र शांति का प्रसार करना चाहते हैं?

दूसरों के प्रति कड़वाहट और शिकायत ही मन में बनी रहती है।
शांति फैलाने के बारे में बहुत कम सोचता हूँ।
अपने करीबियों के बीच शांति चाहता हूँ।
अपने व्यवहार से शांति का माहौल बनाने का प्रयास करता हूँ।
सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करने की कोशिश करता हूँ।
सर्वे भवन्तु सुखिनः के पावन भाव से हर क्षण प्रेम, करुणा व शांति का दीपक प्रज्वलित रखता हूँ।
#50

क्या आप मानते हैं कि सच्ची शांति बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आपके अपने आंतरिक विवेक और समभाव से आती है?

शांति केवल तभी मिल सकती है जब पूरी दुनिया मेरी इच्छा अनुसार चले।
परिस्थितियों पर ही मेरी शांति पूरी तरह निर्भर है।
दोनों बातों का मिला-जुला प्रभाव मानता हूँ।
आंतरिक समझ को अधिक महत्वपूर्ण मानता हूँ।
मानता हूँ कि शांति मन की आन्तरिक स्थिति है।
समत्वं योग उच्यते—परिस्थिति कैसी भी हो, आन्तरिक समभाव और परमात्मा में निष्ठा ही शाश्वत शांति है।